सहारनपुर में नकली नोटों का आंकड़ा 17 करोड़ तक पहुंचा, बैंकिंग सिस्टम पर उठे बड़े सवाल, तीन बैंक प्रबंधकों समेत हाउस कीपर पर केस

How Did the Counterfeit Currency Reach the Chest?

सहारनपुर : सहारनपुर के घंटाघर स्थित सोफिया मार्केट की पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) शाखा की करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। शुरुआती जांच में करीब 7 करोड़ 40 लाख रुपये की नकली करेंसी मिलने के बाद अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 17 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आ रही है। हालांकि करेंसी चेस्ट का ऑडिट और नोटों की जांच अभी जारी है। ऐसे में नकली नोटों की कुल रकम आगे और बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

करोड़ों रुपये की नकली करेंसी का बैंक की करेंसी चेस्ट तक पहुंचना अपने आप में गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मामला सामने आने के बाद बैंक के साथ-साथ पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर भी जांच तेज कर दी गई है। पुलिस आरोपितों की भूमिका और नकली नोटों के स्रोत का पता लगाने में जुटी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम यानी एसआईटी गठित किए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। दूसरी ओर प्रकरण में सीबीआई जांच की संभावना की चर्चा ने भी हलचल बढ़ा दी है।

आपको बता दें कि मामले की शुरुआत उस समय हुई जब पीएनबी की करेंसी चेस्ट से करीब 11.50 करोड़ रुपये की करेंसी आरबीआई की जयपुर चेस्ट भेजी गई। यह रकम पांच अगस्त को भेजी गई थी। जयपुर चेस्ट में करेंसी की गिनती के दौरान 4 लाख 30 हजार 900 रुपये कम पाए गए। इसकी जानकारी पीएनबी मेरठ के अधिकारियों को दी गई। इसके बाद बैंक के मुख्य प्रबंधक एवं जांच अधिकारी अरुण कुमार चौबे को मामले की जांच के लिए सहारनपुर भेजा गया। जांच के दौरान करेंसी चेस्ट में काम करने वाले पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल कुमार की भूमिका सामने आई। बैंक अधिकारियों के मुताबिक विशाल को नोटों की गड्डियां व्यवस्थित करने का काम दिया गया था। जांच में उसके द्वारा गड्डियों से रुपये निकालने की बात सामने आई और वह सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हुआ।

रकम कम मिलने के बाद बैंक ने नौ अगस्त से करेंसी चेस्ट का विस्तृत ऑडिट शुरू किया। नोटों की गिनती और सत्यापन के दौरान जांचकर्ताओं को बड़ी मात्रा में नकली करेंसी मिली। सोमवार को हुई जांच शुरुआत में नकली नोटों की रकम करीब 7.40 करोड़ रुपये बताई गई, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ नकली नोटों की मात्रा बढ़ती गई। अब यह रकम करीब 17 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आ रही है। बैंक की ओर से करेंसी की पूरी जांच अभी जारी है। इसलिए अंतिम आंकड़ा इससे अलग हो सकता है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में कितनी नकली करेंसी करेंसी चेस्ट में मौजूद थी।

सहारनपुर के बैंक में नकली करेंसी मिलने के बाद बैंक के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे। जांच के दौरान वरिष्ठ मंडल प्रबंधक रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील कुमार और हरियाणा के यमुनानगर-जगाधरी स्थित करेंसी चेस्ट के प्रबंधक अमित कुमार के नाम सामने आए।bजांच अधिकारी ने इन अधिकारियों से मामले के संबंध में जानकारी मांगी। बैंक अधिकारियों के अनुसार उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद उच्चाधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी गई। 29 अगस्त की शाम तीनों अधिकारियों के खिलाफ थाना सदर बाजार में शिकायत देकर मुकदमा दर्ज कराया गया। बैंक की ओर से यह भी बताया गया कि तीनों प्रबंधकों को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि उनकी वास्तविक भूमिका क्या रही और नकली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही होगा।

वहीं जयपुर भेजी गई करेंसी में लाखों रुपये की कमी सामने आने के बाद पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल कुमार के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। बैंक की जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उस पर नोटों की गड्डियों से रुपये निकालने का आरोप है। उसके खिलाफ रुपये चोरी करने का मुकदमा दर्ज कराया गया है और बैंक ने उसे काम से हटा दिया है। पुलिस अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हाउस कीपर द्वारा रुपये निकालने की घटना और करेंसी चेस्ट में मिली करोड़ों रुपये की नकली करेंसी के बीच कोई संबंध है या दोनों मामले अलग-अलग हैं।

नकली नोटों के मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठना लाजमी है कि करोड़ों रुपये के नकली नोट बैंक की करेंसी चेस्ट तक आखिर पहुंचे कैसे। करेंसी चेस्ट में बड़ी मात्रा में नकदी का रखरखाव होता है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसे दूसरी शाखाओं या आरबीआई चेस्ट तक भेजा जाता है। ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोटों का यहां तक पहुंचना सामान्य लापरवाही से कहीं बड़ा मामला माना जा रहा है।

डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली नोट किसी दूसरी बैंक शाखा से आए किसी अन्य करेंसी चेस्ट के माध्यम से पहुंचे या बैंकिंग चैनल में किसी अन्य स्तर पर इनकी एंट्री हुई। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू करेंसी की जांच करने वाली मशीनें भी हैं। सवाल उठ रहा है कि यदि नोटों की मशीनों से जांच की गई थी तो करोड़ों रुपये के नकली नोट पहचान में क्यों नहीं आए। यदि मशीनों से जांच नहीं हुई तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी। इसके अलावा कैश मूवमेंट रिकॉर्ड, बंडल, सील, बैंक रजिस्टर, गिनती की प्रक्रिया और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि नकदी किस तारीख को आई, किसने गिनी, किस मशीन से जांच हुई और किस अधिकारी ने उसे स्वीकार किया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी अभिषेक सिंह, जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान और एसएसपी ने सोफिया मार्केट स्थित पीएनबी करेंसी चेस्ट का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था, नकदी के रखरखाव और करेंसी सत्यापन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। साथ ही मामले से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी जानकारी बैंक अधिकारियों से ली गई। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस आरोपितों की भूमिका की जांच के साथ उनकी गिरफ्तारी की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। एसआईटी गठित किए जाने पर विचार किया जा रहा है। टीम आरोपितों के संपर्क, संभावित ठिकानों और मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर सकती है।

वहीं करीब 17 करोड़ रुपये की नकली करेंसी सामने आने के बाद अन्य करेंसी चेस्ट और बैंकिंग चैनल भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। यदि यह साबित होता है कि नकली नोट किसी दूसरे चेस्ट या बैंक शाखा से यहां पहुंचे थे, तो जांच का दायरा सहारनपुर से बाहर भी जा सकता है। फिलहाल बैंक और पुलिस दोनों स्तर पर जांच जारी है। करेंसी की पूरी जांच और दस्तावेजों के मिलान के बाद ही यह साफ होगा कि नकली नोटों की वास्तविक मात्रा कितनी है और इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग शामिल हैं।
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